ऑपरेशन सिंदूर: सद्विप्रों के हवन पूजन से भस्म हुआ पाकिस्तान !

ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय सेना के द्वारा पाकिस्तानी जमीन पर किया गया एक ऐसा प्रहार, जिसे दुनिया ने सिंदूर अटैक का नाम दिया। सनातन धर्म में जिस सिंदूर को सुहागिन औरतों की पहचान माना जाता है। उसे पहलगाम आतंकी हमले के इंतकाम का निशान बनाया गया। पहलगाम में हुए खौफनाक हमले को लेकर सद्गुरु धाम से जुड़े लोगों की क्या तैयारी थी, उस पर हम आए लेकिन उससे पहले सिंदूर को लेकर सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज का क्या कहना है, उसे जान लेते हैं।

सिंदूर को लेकर क्या कहते हैं सद्गुरु ?

सद्गुरु सिंदूर की महत्ता बताते हुए कहते हैं कि सुहागिन औरतें अपने सुहाग यानी अपने पति के लिए सिंदूर लगाती है। वह सिंदूर भले ही अपनी मांग में भरती है लेकिन वह उनके पति के निमित लगता है। सद्गुरु आगे कहते हैं कि पति के निमित लगाए गए सिंदूर से किसी भी पत्नी के पति की उम्र लंबी होती है। वह पति अपनी पत्नी के सामने नहीं मरता। वहीं जब कोई शिष्य सच्ची श्रद्धा से तिलक लगाता है।  तो अपने गुरु के निमित लगाता है और इस तिलक का प्रभाव ऐसा होता है कि उस शिष्य के बिना मांगे उसके गुरु की रिद्धी-सिद्धी उसमें प्रवाहित होने लगती है। 

ऑपरेशन सिंदूर क्यों पड़ा इस एयरस्ट्राइक का नाम ?  

सिंदूर को हिंदू धर्म में सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। सिंदूर के बिना औरत सुहागन नहीं हो सकती, क्योंकि वह खुद के लिए नहीं बल्कि अपने पति की लंबी उम्र के लिए सिंदूर लगाती है। पहलगाम हमले में आतंकियों के द्वारा निर्दोष पतियों को उनकी पत्नियों के सामने मारा गया था, इसलिए भारतीय सशस्त्र बल के द्वारा इसका नाम ऑपरेशन सिंदूर दिया गया। ताकि आतंकियों को इसका असली महत्व समझाया जा सकें। सिंदूर का उल्लेख हिंदू शास्त्रों में भी मिलता है। ऐसी मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर इसलिए लगाती है कि उनके पति को अकाल मृत्यु का भय न हो। शास्त्रों की माने तो सिंदूर के प्रयोग से माता सती और मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है साथ ही दाम्पत्य जीवन में सुख और समृद्दि भी आती है। 

सद्विप्रों ने क्यों किया हवन पूजन का आयोजन

पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए करीब 26 परिवार के सदस्यों की आत्मा की शांति के लिए हवन पूजन का आयोजन किया गया था। इसको लेकर अमावस्या के पावन अवसर पर यूपी के शाहजहांपुर के साथ महाराष्ट्र के अमरावती में भी में हवन पूजन का आयोजन किया गया था।