सद्गुरु ने बताया ब्रह्मोस से भी ज्यादा खतरनाक अस्त्र का पता

Dadhichi

सनातन हिंदू धर्म ग्रंथो में ऐसे ऐसे दिव्यास्त्रों का वर्णन है जिन्हें चलाने मात्र से तीनों लोक भष्म हो सकते हैं. आज हम आपको पूज्य सद्गुरु स्वामी श्रीकृष्णानंद जी की महान और शोधपरक पुस्तक ‘कहै कबीर कुछ उद्यम कीजै’ से एक ऐसे शस्त्र के निर्माण के बारे में बताने जा रहे हैं जो न केवल ब्रह्मोस मिसाइल बल्कि दुनिया के सभी अस्त्र शस्त्रों से भी ज्यादा प्रलयंकारी है। आप ये जान कर आश्चर्य से भर जाएंगे कि ये अस्त्र किसी लोहे या न्यूक्लियर मैटेरियल से नहीं बना था बल्कि ये एक ऋषि की हड्डियों से बना था। इसी अस्त्र को आज हम सभी इंद्र के वज्र या वज्रास्त्र के नाम से जानते हैं जिन्हें इंद्र असुरों के वध और संसार के कल्याण के लिए चलाते हैं।

किस ऋषि का शरीर था ब्रह्मोस से भी ज्यादा खतरनाक ?

सद्गुरु स्वामी श्री कृष्णानंद जी की पुस्तक ‘कहै कबीर कुछ उद्यम कीजै’ में इस अस्त्र के निर्माण के बारे में सबसे सटीक जानकारी मिलती है। पूज्य सद्गुरु ने अपनी इस पुस्तक में बताया है कि ऋषि अथर्वा के एक तपस्वी पुत्र थे जिनका नाम ऋषि दधिचि था। ऋषि दधिचि इतने बड़े तपस्वी थे कि उनका सारा शरीर इतना पवित्र और शक्तिशाली हो चुका था कि उन्हें संसार में कोई भी पराजित नहीं कर सकता था, न तो राक्षस, न ही असुर और न ही देवता उनकी बराबरी करने की सोच भी सकते थे।

ऋषि दधिचि को क्यों करना पड़ा अपनी हड्डियों का दान?

पूज्य सद्गुरु अपनी इस पुस्तक में आगे बताते हैं कि वेदों के समय में एक असुर वृत्रासुर  सारे संसार में अपने अत्याचारों से पीड़ित कर चुका था। देवताओं के कोई भी अस्त्र शस्त्र उसको मारने में  विफल थे। तब देवताओं ने ऋषि दधिचि से आग्रह किया  कि वो अपने शरीर की हड्डियों का दान कर दें ताकि भगवान विश्वकर्मा उन हड्डियों से एक ऐसे अस्त्र का निर्माँण कर सकें जिससे वृत्रासुर का वध हो सके। ऋषि दधिचि संसार के कल्याण के लिए अपने शरीर का दान करने के लिए समाधि में चले गए। तब इंद्र ने उनके शरीर पर नमक छिड़कना शुरु कर दिया और तब पृथ्वी एक गाय का रुप धारण कर ऋषि के शरीर के मांस को चाटने लगीँ। धीरे धीरे ऋषि क शरीर का सारा मांस गाय बनी पृथ्वी ने चाट लिया और इसके बाद जब ऋषि की सिर्फ हड्डियाँ बची रह गईं तो भगवान विश्वकर्मा ने उन हड्डियों से एक ऐसे अस्त्र का निर्माण किया जिसे संसार में वज्र कहा गया । इंद्र ने इन हड्यियों से बने वज्र से ही वृत्रासुर का वध कर दिया।

कलयुग के हिसाब से कितना ताकतवर है इंद्र का व्रज ?

हड्डियों के दान से जुड़ी बात ऋषि दधिचि की पत्नी वेदवती को मालूम हुई तो उन्होंने संसार की समस्त गायों को शाप दे दिया कि वो कलियुग में विष्ठा खाएंगी। इसके अलावा वेदवती ने ये भी कहा कि जब ऋषि की हड्डियों से वृत्रासुर का वध हो सकता था तो फिर ऋषि को इस प्रकार मारने की जरूरत क्या थी। क्योंकि वो तो स्वयं ही वृत्रासुर का वध कर सकते थे। बाद में इंद्र आदि देवताओं ने वेदवती से क्षमा मांगी और इंद्र ने ऋषि की हड्डियो से बने वज्र को अपना मुख्य अस्त्र बना लिया। पूज्य सद्गुरु आगे बताते हैं कि ऋषि की हड्डियों से बना ये वज्र इतना शक्तिशाली था कि उसकी तुलना सिर्फ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र और शिव के पिनाक धनुष से की जा सकती थी। इंद्र ने बाद में इस वज्र से नमुचि जैसे कई असुरों का संहार कर संसार का कल्याण किया।

ऋषि-मुनि की हड्डियों से बनाए जाते थे अस्त्र-शस्त्र

आपको ये जान कर हैरानी होगी कि महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के धनुष गांडीव का निर्माण भी वज्र बनाते समय ऋषि की हड्डियों के बचे हुए भाग से किया गया था और अर्जुन का गांडीव कितना खतरनाक था ये आप सभी जानते हैं।

सद्गुरु अपनी इस पुस्तक में ये बताते हैं कि सनातन धर्म के ऋषियों ने न केवल स्वयं की मुक्ति के लिए तपस्या की बल्कि संसार के कल्याण के लिए भी इन ऋषियों ने अपना सर्वस्व दान कर दिया था। आज हम ब्रह्मोस जैसे मिसाइलों की बात करते हैं लेकिन अगर आप पूज्य सद्गुरु की शोधपरक पुस्तकों को पढ़ेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि सनातन धर्म के ऋषियों और देवताओं के पास ऐसे ऐसे दिव्यास्त्र थे जो संसार में आज किसी भी देश के पास उपलब्ध नहीं हैं।

हमे पूरी आशा है कि आपको पूज्य सद्गुरु के शोधपरक पुस्तक ‘कहै कबीर कुछ उद्यम कीजै’ से बताई गई ये जानकारी बहुत अच्छी और ज्ञानवर्धक लगी होगी। आपसे निवेदन है कि आप सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज के द्वारा लिखी बाकी पुस्तकों का अपने ज्ञान वर्धक के लिए जरूर अध्धयन करें।