23 अगस्त को भाद्रपद अमावस्या की तिथि पर पोला पर्व मनाया गया। इस दिन पूरे छत्तीसगढ़ में पोरा पर्व की धूम देखने को मिली। इस मौके पर तरह-तरह के व्यंजनों के साथ लोग बैलों की पूजा करत हुए भी दिखे, वहीं छत्तीसगढ़ के सद्गुरु धाम आश्रम गौरखेड़ा में भी विशेष पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान मंगलाचारण आरती, ध्यान, हवन कीर्तन के साथ भंडारे की व्यवस्था भी की गई। प्रकृति को समर्पित इस पर्व के आयोजन के दौरान रविशंकर, जितेंद्र और दामोदर जी के साथ हसुआ व बलौदा बाजार के सद्विप्र समाज के अन्य लोग भी मौजूद रहें।
क्या होता है पोला पर्व ?
भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां सदियों से खेती बाड़ी के लिए बैलों की मदद ली जाती है। हालांकि आधुनिक युग में भले ही बैलों का उपयोग कम हो गया हो, लेकिन आज भी कई राज्य ऐसे हैं, जो इनकी महत्व को कम नहीं समझते। इन्हीं राज्यों में शामिल है छत्तीसगढ़, जहां हर साल पोला पर्व मनाया जाता है और इस दिन बैलों की पूजा की जाती है। लोगों की माने तो- इस मौके पर स्वयं महादेव बैलों पर सवार होते हैं, इसलिए इस पर्व को बैलों की पूजा का त्योहार भी कहा जाता है।

