सद्गुरु के चरणों में मिली जीवन की दिशा | Patna Sadguru…
आज का मनुष्य बाहर की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि अपने भीतर की आवाज़ सुनना भूल गया है। जीवन में प्रश्न तो बहुत…
इस साधना में अपने सांसारिक मोह को त्यागकर खुद को एकाकी मानना होता है और फिर परमपूज्य गुरुदेव की कृपादृष्टि से आत्मिक योग का संचालन होता है। जो हमें हमारे होने का बोध कराता है समस्त ब्रह्माण्ड में चराचर प्राणियों को देखने के सौभाग्य के साथ-साथ परमात्मा के दर्शन भी प्राप्त होते हैं लेकिन आत्मा से परमात्मा तक जाने में एकाग्रता का होना अत्यावश्यक होता है। परमपूज्य गुरु जी के कथनानुसार कुंडलिनी साधना के लिए अभ्यास, एकाग्रचित्तता तथा आत्मिक अभिलाषा का होना अधिक जरूरी होता है।
दिव्य गुप्त विज्ञान से मन के दैविक गुण जैसे धैर्य, सन्तोष, सहिष्णुता व प्रेम जाग जाते हैं और इस संसार में ही स्वर्ग दिखने लगता है |
प्रेम को अध्यात्म का मूल मंत्र बताया गया है इसलिए प्रेम साधना से आत्मा को मुक्ति मिलना निश्चित है।
प्रेम साधना के माध्यम से शत्रु को भी वश में किया जा सकता है।
सद्गुरु से दीक्षा लेने के बाद मुझे ऐसा लगा कि, इस समय यदि भगवान बुद्ध के समान कोई दीक्षा दे सकता है तो वो स्वामी कृष्णानंद जी महाराज के अलावा दूसरा कोई नहीं है
डॉ. सुप्रीति AIIMS DELHI
मेरी ज़िंदगी लंबे समय तक एक भटके हुए मुसाफ़िर की तरह थी – उद्देश्यहीन, उलझनों से भरी और भीतर एक खालीपन का एहसास लिए हुए।
दिनेश कुमार सिंह WIN MEDICAREआज का मनुष्य बाहर की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि अपने भीतर की आवाज़ सुनना भूल गया है। जीवन में प्रश्न तो बहुत…
सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज एकमात्र ऐसे महान संत हैं जिन्होंने DSS, Divine Secret Science नामक आध्यात्मिक पद्धति को खोजा, जो साधक को भीतर से जाग्रत…
रामायण के अनेक प्रसंग हमारे जीवन को गहराई से स्पर्श करते हैं,लंका विजय, रावण वध और फिर सबसे करुण और भावुक क्षण सीता–राम मिलन। अक्सर हम…
आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और अशांति के बीच यदि कोई व्यक्ति सच्ची शांति और संतुलन की खोज करता है, तो साधना ही उसका वास्तविक मार्ग…
सद्गुरु की दीक्षा लेने के बाद मैं उस मुकाम पर पहुंच गया जिसे मैं पाना चाहता था, इसके अलावा उनके पास इतनी शक्ति है कि वे हिंसक जीव को भी अपने वश में कर सकते है
ठाकुर नारायण तिवारी ASI (यूपी पुलिस)