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तीन सिद्धियों के बिना कैसे गुलाम है इंसान ?

तीन सिद्धियों के बिना कैसे गुलाम है इंसान ?

भगवान बुद्ध ने कहा था कि यह संसार दुखों से भरा हुआ है. क्योंकि यहां रहने वाला इंसान हर चीज को खुद में बांधना चाहता है। वह उन वस्तुओं में खुश नहीं जो उन्हें प्राप्त हुआ है। इसलिए सबकुछ मिल जाने के बाद भी वह…

क्या सच में आत्मा अमर है ?

क्या सच में आत्मा अमर है ?

ये एनं वेत्ति हंतारं, यश्चैनं मन्यते हतम्उभौ तौ न विजानीतो, नायं हन्ति न हन्यते अर्थात जो इस आत्मा को मारनेवाला समझता है और जो इसको मरा हुआ मानता है। वे ये नहीं जानते कि यह आत्मा न तो किसी को मारता है और न कोई…

क्या सच में जीवन का अंतिम सत्य है मुत्यु ?

क्या सच में जीवन का अंतिम सत्य है मुत्यु ?

मृत्यु को जीवन का अंतिम सत्य कहा गया है। उसको लेकर हमारे समाज के अधिकतर लोग खौफ में रहते हैं। ये डर इस हद तक हावी रहता है कि लोग इसे बिना समझे ही इसकी कल्पना करने लगते हैं। कुछ दार्शनिक मृत्यु और जीवन के…

‘मनन’ से कैसे प्रगट होते हैं भगवान शिव ?

‘मनन’ से कैसे प्रगट होते हैं भगवान शिव ?

मनन जिसे करने से लक्ष्य मार्ग में कोई अड़चन नहीं आती। मनन जिससे भगवान शिव प्रतिष्ठा के साथ प्रगट होते हैं, और वो मनन जिसके जरिए गुरु नानक ने धार्मिक संबंध का रास्ता बताया है।क्या यह मनन और कैसे होगी इससे मोक्ष द्वार की प्राप्ति…

गुरु-शिष्य परंपरा का असली अर्थ क्या है?

गुरु-शिष्य परंपरा का असली अर्थ क्या है?

भारतीय साहित्य में ऋषि-परम्परा अत्यन्त पवित्र रही है। इसका प्रमाण हमें उन ऋषियों से मिलता है। जिसमें मनु, अत्रि याज्ञवल्क्य, विश्वामित्र, दधीचि, कश्यप, गर्ग, गौतम , राम, कृष्ण, कबीर के साथ नानक और रविदास भी शामिल है। ये ऐसे ऋषि है, जिन्होंने गुरुगृह में जाकर…

क्या होता है तप का वास्तिवक अर्थ ?

क्या होता है तप का वास्तिवक अर्थ ?

रामचरित मानस की चौपाई ये बताती है, जिस इंसान की जैसी भावना रहती है फलाफल वैसा ही मिलता है। इस बात को समझनी है तो आप,  ब्राह्मण कौशिक से जुड़े कुछ प्रसंगों से समझ सकते हैं। जिसका जिक्र ‘उमा कहऊं मैं अनुभव अपना’ के अध्याय…

सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज की कैसे हुई संत कबीर से मुलाकात ?

सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज की कैसे हुई संत कबीर से मुलाकात ?

अध्यात्म, साधना, परम ऊर्जा और त्रिनेत्र के भाव प्रसंगों का नतीजा है शिवनेत्र। जिसमें सद्गुरु के द्वारा उन बातों का विस्तृत पूर्वक वर्णन किया गया है। जो किसी भी इंसान के अंदर मौजूद तो है, लेकिन वो उस परम ऊर्जा की पहचान नहीं कर पा…

धर्मो रक्षति रक्षित:

धर्मो रक्षति रक्षित:

ज्ञान, कर्म, भक्ति और योग को परिभाषित करने वाले श्रीमद्भागवत गीता एक ऐसा ग्रंथ है। जिसमें धर्म और अर्धम की व्याख्या की गई है। इस शास्त्र में कौरव और पांडवो के साथ कुरुक्षेत्र के वो खूनी दृश्य भी शामिल है। जहां से गीता के श्लोकों…

एक ब्राह्मण की वजह से सोमनाथ मंदिर में हुई थी लूट ?

एक ब्राह्मण की वजह से सोमनाथ मंदिर में हुई थी लूट ?

हमारा देश भारत अपनी विविधिताओं के जरिए कई तरह की कहानियों को समेटे हुए हैं। इसमें हिंदुस्तान को बंटने से लेकर लूटने तक और मंदिर-मस्जिदों को बनने से लेकर ढहने तक कई किस्सें शामिल है। इन्ही वृतांतों में एक कहानी सोमनाथ मंदिर से जुड़ी हुई…

एक स्त्री ने शेख फरीद को कैसी सीख दी ? अपने सद्गुरु से कैसे मिले बाबा फरीद ?

एक स्त्री ने शेख फरीद को कैसी सीख दी ? अपने सद्गुरु से कैसे मिले बाबा फरीद ?

कबीर से लेकर गुरु हरिकृष्ण साहिब और भगवान बुद्ध से लेकर गुरु नानक साहिब तक आपने कई संत और गुरु भक्तों की कहानी सुनी होंगी। इन्हीं गुरु भक्तों में शेख फरीद भी शामिल है, जो एक मुस्लिम संत थे और बचपन में अल्लाह की भक्ति…

ऋषि जाजली को क्यों नहीं मिल पा रहा था धर्म का ज्ञान ?

ऋषि जाजली को क्यों नहीं मिल पा रहा था धर्म का ज्ञान ?

अध्यात्म से जुड़े इस संसार में लोग जितना ध्यान पूजा पाठ कराने वाले पंडितों पर देते हैं। उतनी ही ध्यान उन तपस्वियों पर देते हैं जिनको लेकर सदियों से कुछ के मन में यह धारणा बैठ गई है कि- संन्यासियों का कोई घर नहीं होता…

क्या भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध को सही बताया था ?

क्या भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध को सही बताया था ?

आज दुनिया युद्ध के सिरआने पर खड़ी है. जहां देखों वहां युद्ध की आहट सुनाई दे रही है. ऐसे ही संघर्षों को देखते हुए सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज ने अपनी किताब ‘गीता ज्ञान मंदाकिनी’ में लिखते हुए ये बताया है कि युद्ध किसी समस्या…