नए जमाने की नई परंपरा हनीमून से तो आप भलि भांति परिचित होंगे, यह वही चलन है, जिसके बिना आज की अधिकतर शादियां अधूरी मानी जा रही है। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि नव विवाहित जोड़ों को एक दूसरे को समझने के लिए यह अच्छी परंपरा है, क्योंकि इस दौरान शादी के बाद नए जोड़े एक दूजे के साथ अच्छा समय व्यतीत करते हैं। हालांकि नए जमाने के इस चलन को लेकर एक सच्चाई यह भी है कि इसके बाद अधिकतर रिश्ते टूटते हुए भी नजर आ रहे हैं। इसे आप हाल ही में घट चुकी कुछ घटनाओं से समझ सकते हैं। जिसमें मुख्यत: राजा रघुवंशी हत्याकांड शामिल है, वहीं हनीमून शब्द की उत्पति और यह भारत की सभ्यता को कैसे प्रभावित कर रहा है। इस पर आगे बात करें लेकिन उससे पहले इसको लेकर सद्गुरु का क्या कहते हैं, उसे जान लेते हैं-
Honeymoon को लेकर सद्गुरु बताते हैं कि- “नए जमाने की नई परंपरा से रिश्ते कुछ समय के लिए मजबूत दिखते हैं, उन सात जन्मों तक नहीं, जिसे आप अग्नि का साक्षी मानकर शादी के बंधन में बंधते हैं। इसलिए हनीमून जैसे नए चलन पर विचार करने से पहले दस बार सोचिए और अपने घर,परिवार-समाज में रहकर ही अपने रिश्ते को समझने की कोशिश कीजिए, ताकि आपके संबंध और मजबूत हो सकें”
क्या है Honeymoon और कहां से हुई इसकी उत्पति ?
हनीमून एक अंग्रेजी शब्द है, जो honey और moon से मिलकर बना है। इसमें हनी, शहद, मिठास या रिश्तों के प्रतीक के लिए प्रयोग होता है तो वहीं मून, चांद या रिश्तों के समय को दिखाता है, हालांकि जिस शब्द का संबंध रिश्ते-नाते से है। उसको लेकर सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि, यह पश्चिमी सभ्यता का शब्द है। जिसकी उत्पति 16वीं शताब्दी के ब्रिटेन से मानी जाती है। इसको लेकर ऐसा बताया जाता है कि साल 1509 से 1547 के दरमियान इंग्लैंड के राजा हेनरी अष्टम ने अपनी दूसरी रानी ऐनी बोलेन के साथ शादी के बाद थॉर्नबरी कैसल में एक सप्ताह से अधिक का समय बिताए थे। इसके अलावा चार्ल्स द्वितीय भी अपनी दुल्हन के साथ हैम्पटन कोर्ट पैलेस चले गए थे। साल 1800 के दौरान यह चलन इंग्लैड के बड़े शहरों तक जा पहुंचा था, जिस समय इसका मतलब शादी के बाद की यात्रा नहीं था, बल्कि सिर्फ शादी का पहला महीना था। इस प्रथा को यूरोप के लोगों के द्वारा रिश्तों में मधुरता से देखा जाने लगा… तभी से ये लोग इसे हनीमून के नाम से पुकारने लगे।
कैसे अंग्रेजों की गंदी सोच की उपज है हनीमून ?
पश्चिमी देशों ऐसी भी कहानियां सुनने को मिलती है कि 16वीं शताब्दी में दूल्हा-दुल्हन शादी के बाद एक महीने तक शहद से बनी शराब पीते थे, ताकि संतान उत्पति में उन्हें मदद मिल सके। वहीं बात इससे जुड़े इतिहास की करें तो- हनीमून शब्द की शुरुआत 05वीं सदी के मध्यकालीन युग में देखने को मिलती है। जब अपहरण करके शादी करने की परंपरा थी। दरअसल 05वीं सदी के दौरान दूल्हा अपनी होने वाली दुल्हन को उसके परिवार की अनुमति के बिना ही चुपचाप उठा ले जाता था और उसके साथ इस उम्मीद में संबंध बनाता था कि वह गर्भवती हो जाए। हालांकि यह प्रयास सफल होता, तो उनकी शादी हो जाती, और यदि वह महिला गर्भवती नहीं होती तो उसे पश्चिमी समाज के द्वारा त्याग दिया जाता था। 05वीं सदी से शुरू हुआ यह चलन धीरे-धीरे बदलते समाज के हिसाब से बदलता गया और 16वीं शताब्दी में यह इंग्लैड समेत पश्चिमी समाज में घुल-मिल गया। इसका असर ये हुआ कि जहां पहले दुल्हा अपनी होने वाली दुल्हन का अपहरण करता था, अब वह अपहरण करने के बजाय शादी के बाद उसकी सहमति के साथ उसे यात्रा में ले जाता हैं और दोनों एक दूसरे की समझने की कोशिश करते हैं।
भारत में कैसे शुरू हुई हनीमून की परंपरा ?
भारत में भी अब यह पश्चिमी परंपरा घर-घर में जगह बना चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह 90 का दशक है। जिसे भारतीय इतिहास में क्रांति के तौर पर देखा जाता है। असल में 90 के दशक में टेलीविजन ने भारतीय समाज में जगह बनानी शुरू कर दी। इस दौरान टीवी पर आने वाले सीरियल्स में पश्चिमी सभ्यता के दृश्य दिखाए जाने लगे। इनमें हनीमून से जुड़े चित्रण भी शामिल है। जिस पर होने वाली चर्चा आज टीवी के माध्यम से भारत के अधिकतर परिवारों के ड्राइंग रूम तक जा पहुंची है।