तीन सिद्धियों के बिना कैसे गुलाम है इंसान ?
भगवान बुद्ध ने कहा था कि यह संसार दुखों से भरा हुआ है. क्योंकि यहां रहने वाला इंसान हर चीज को खुद में बांधना चाहता…
इस साधना में अपने सांसारिक मोह को त्यागकर खुद को एकाकी मानना होता है और फिर परमपूज्य गुरुदेव की कृपादृष्टि से आत्मिक योग का संचालन होता है। जो हमें हमारे होने का बोध कराता है समस्त ब्रह्माण्ड में चराचर प्राणियों को देखने के सौभाग्य के साथ-साथ परमात्मा के दर्शन भी प्राप्त होते हैं लेकिन आत्मा से परमात्मा तक जाने में एकाग्रता का होना अत्यावश्यक होता है। परमपूज्य गुरु जी के कथनानुसार कुंडलिनी साधना के लिए अभ्यास, एकाग्रचित्तता तथा आत्मिक अभिलाषा का होना अधिक जरूरी होता है।
दिव्य गुप्त विज्ञान से मन के दैविक गुण जैसे धैर्य, सन्तोष, सहिष्णुता व प्रेम जाग जाते हैं और इस संसार में ही स्वर्ग दिखने लगता है |
प्रेम को अध्यात्म का मूल मंत्र बताया गया है इसलिए प्रेम साधना से आत्मा को मुक्ति मिलना निश्चित है।
प्रेम साधना के माध्यम से शत्रु को भी वश में किया जा सकता है।
भगवान बुद्ध ने कहा था कि यह संसार दुखों से भरा हुआ है. क्योंकि यहां रहने वाला इंसान हर चीज को खुद में बांधना चाहता…
ये एनं वेत्ति हंतारं, यश्चैनं मन्यते हतम्उभौ तौ न विजानीतो, नायं हन्ति न हन्यते अर्थात जो इस आत्मा को मारनेवाला समझता है और जो इसको…
मृत्यु को जीवन का अंतिम सत्य कहा गया है। उसको लेकर हमारे समाज के अधिकतर लोग खौफ में रहते हैं। ये डर इस हद तक…
मनन जिसे करने से लक्ष्य मार्ग में कोई अड़चन नहीं आती। मनन जिससे भगवान शिव प्रतिष्ठा के साथ प्रगट होते हैं, और वो मनन जिसके…