Prem Sadhan

इस साधना में अपने सांसारिक मोह को त्यागकर खुद को एकाकी मानना होता है और फिर परमपूज्य गुरुदेव की कृपादृष्टि से आत्मिक योग का संचालन होता है। जो हमें हमारे होने का बोध कराता है समस्त ब्रह्माण्ड में चराचर प्राणियों को देखने के सौभाग्य के साथ-साथ परमात्मा के दर्शन भी प्राप्त होते हैं लेकिन आत्मा से परमात्मा तक जाने में एकाग्रता का होना अत्यावश्यक होता है। परमपूज्य गुरु जी के कथनानुसार कुंडलिनी साधना के लिए अभ्यास, एकाग्रचित्तता तथा आत्मिक अभिलाषा का होना अधिक जरूरी होता है।

Benefits

दिव्य गुप्त विज्ञान से मन के दैविक गुण जैसे धैर्य, सन्तोष, सहिष्णुता व प्रेम जाग जाते हैं और इस संसार में ही स्वर्ग दिखने लगता है |

प्रेम को अध्यात्म का मूल मंत्र बताया गया है इसलिए प्रेम साधना से आत्मा को मुक्ति मिलना निश्चित है।

प्रेम साधना के माध्यम से शत्रु को भी वश में किया जा सकता है।

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